Wednesday, May 2, 2007

अध्याय -आठ


एती संझा घलोक दुलरवा हा घर नई पहुंचिस त रमई कका हा दुलरवा के घर तार भेजिस के दुलरवा के कहूंच पता नई चलत ए। कहूं उहां चल दिस होही त हमला झटकन खबर करव।

इहां रथिया तार पहुंचिस। दुलरवा के भइया ह तार पढ़िस अऊ सन्न खा के रहिगे।आखिर दुलरवा गइस कहाँ य़ कहूं ओहा कांही उटपुटांग त नई कर डारिस। ओहा अपन खोली मां पहुंचीस। दुलरवा के भौजी जाग गेय रिहिस। ओहा पूछिस – कहां के तार आय ? फेर डेरहा अभी बताइला ठउका नई समझिस अऊएती ओती के कोठ मां ओला टरका दिस। काबर के ओहा जानत रिहिस हे के दुलरवा ह जतका येला चाहथे तेखर ले कतको जादा येहा दुलरवा ला चाहथे। तउने पायके ओला बताना ठउका नई समझिस।

बिहिनिया डेरहा हा पूछिस अरे सुनत हस ? दुलरवा ह कबले आहूं केहे रिहिस ?

भौजी हा कहिस – भई ससुरार गेय हे अऊ ओहू मां कोसईन ला लेवाय बर, दू-चार दिन रहिके लहुट आही... आवन त दे ये बखत मजा बता हौं बाबू के, मोला आने जाथे त एक दिन दुभ्भर होजाथे बाबू ला, बने हे, आवन त देव।

संझा होइस। भौजी ह दुवारी मां टांगा ला ठाड़ होत सुनिस अऊ झटकन परदा के ओघा ले टांगा कोती छांके लगीस। फेर दे काये... रमई कका... अकेल्ला ? रमई कका ला अकेल्ला आय देख के भौजी के मन मां रंग-रंग के बने अऊ असुगुन बिचार हा आय लगिस। फेर ओहा अपन ला संभारिस अऊ रमई कका के संग भीतर मां आ गे।

भौजी हा पुछिस – दुलरवा काबर नई आइस ? अतका के सुते रमई कका के हुस उड़ागे, ओखर डोकरा आंखी ह रो डारिस। ओहा गित आंसू ला रोके के अनसकऊ कोसीस करत किहिस – ऊंखर त आज तीन दिन ले पता नई ये!

भौजी के छाती हा धड़के लागिस। हे भगवान! कहां गे मोर दुलरवा हा ? भौजी चिचिया जारिस – दुलरवा का तेंहर मोला छोड़ के... नई तेंहर अइसना नई करे सकस... मेंहर तोर महतारी अंव ना... तेंहर मोला छोड़ के नई जाय सकस, दुलरवा... तैं मोला छोड़ के नई जाय सकस।

भौजी अतेक बेहुस होगे के ओला अतको हुस नई रिहिस के ओमेर दुलरवा के भइया घलोक ठाढ़े हे। ओहू अपन आंसू ला नई रोके सकिस। ओमन भौजी ला समझाइ तेंहर संसो झन कर दुलरवा हमन ला छोड़ के नई जाय सकय। मेंहर आजेच गजट मां छपवा देथंव। हमर दुलरवा आही, अऊ जरूर आही।

आज चार महिना होगे, दुलरवा के कहुंच पता नई लगे सकिस। कतको कोसीस कर डारिन फेर आखिरी मां फल कोन्हों नई निकरिस।

अब बस्ती के सब झिन के मन मां दुलरवा बर मया भरा गेय रिहिस। जौन मेंर देखव दुलरवा के गोठ, मनखे मन काहंय के सच ये दुलरवा के राहत ले ये घर मां चारों पहर आनंद छाय राहय। फेर आज उहां चारों कोती दुखे-दुख के राज होगे हे। भगवान ये घर के खुसी ला वापिस कर दे। फेर जहाँ ले ओ निर्दयी हा रिस जाथे तब कखरो मनाय ले नई मानय।

एती रमई कका के घर पहुंचत ले सोनकुंवर के मन हा उदास हो गेय रिहिस। ओहा अपन करनी ऊपर पछतात रिहिस। ओला अपन चारों कोती अंधियार दिखत रिहिस। फेर उही हाल रिहिस के “अब पछताय ले का होथे, जब चिरई चुग दिस खेत”।

एती दुलरवा के गंवाय के बाद ले भौजी हा खवई पीयई ला छोड़ देय रिहिस। डेरहा हा लाख बेर समझाइस फेर तभो ले बने ढंग के बेरा मां नईच खाइस। भौजी हा अपन ला कुलटनहीन समझे लगिस। मंही दुलरवा ला खा डारेंव। ओला कभूच अराम ले नई राहन देंव। भौजी दिन-दिन कमजोर होत गईस अऊ एक दिन ए मिटइया संसार ले बिदा ले लिस।

डेरहा हा भौजी ला बचाय बर सबो करिस। आघिर मां ओखरो हार होगे।

दुलरवा रेलले गिर के घलोक नई मरे सकिस। फेर जी के घलोक कोनो ला नई जानन दिस के ओहा जियत हे। ओहा गजट पढ़ डारे रिहिस। ओखर जी हा भौजी के दरसन करे बर छटपटा जावय। फेर ओहा नई चाह के मोर मारे भौजी ला समाज मां बदनाम होय बर परय।

भौजी के मरे के हाल सोनकुंवर मेंर घलोक भेजे गिस। ये सोर ला पातेच सोनकुंवर हा अपन मुंड़ ला पबीट डारिस। हे भगवान। तेंहर मोला काबर ओ हासत खेलत घर के सतनानास करे बर पठोय। तेंहर मोर मन मां, मोर मां काबर अइसना संसो आने। ओला अपने ऊपर घिनघिन लागे लागिस। ओहू हा अपन मन के उठत आंधी ला नई रोके सकिस। ओहा गोहार पार के रोय नई सकत रिहिस। काबर के ओहर रोतिस त ओहर चोचला असन लागतिस। पहली सोनकुंवर हा भौजी के मनमाने हिंता करे रिहिस। ओमन सब झिन काय कहहीं। सोनकुंवर के मन मां उदासी हा डेरा डार दिस। ओहा दिन-िदन अकेल्ला रहे लागिस अऊ ओला अकेल्ला रहई हर सुहाय लागिस।

अब सोनकुंवर जब अकेल्ला मां बइठय त ओला आइसन लागदय के भौजी हा ओखर आघू मां आके ठाढ़े हगोगेय हावय अऊ काहत हे... के सोनकुंवर तेंहर मोर दुलरवा ला संभाल ले.... देख ना ओहा केती-केती भटकत हे। सोनकुंवर हा चिचिया डारय। हे भगवान मोला भौजी मेंर भेंट कहा दे अब मेंहर ओखर बिन नई जीये सकंव ?

एती दुलरवा बाहिर राहत चार महिना बीत गेय रिहिस। ओहा अब भौजी के दरसन करे बर तलफत रिहिस। ओहा एक छिन बितावब हर मुस्कुल होत रिहिस। ओखर मन मां का जनी कइसे होत रिहिस। फेर का करय। ओहू ला चुप्पे चुप रहवई हा भावत रिहिस हे। फेर बिन भौजी के दरसन करे ओहा मरना घलोक नई चाहत रिहिस। ओखर सब ले बड़का साध रिहिस के मरे के पहिली भौजी के जरूर दरसन करही।

फेर ओ करमछइड़हा का जानत रिहिस के गे ओखर भौजी हा एक महीना के आघूच चल दिस हे... ओला इही सनसार मां तलफत छोड़ के। वो हा जऊन भौजी के दरसन करना चाहत रिहिस हे ओखर छांव के दरसन घलोक मुस्कुल रिहिस हे।

एक दिन दुलरवा के जी हा अतेक हड़बड़ाय लागिस के ओला अपन अकेल्ला मां रहय घलोक बने नई लागिस। ओहा सड़क, बाजार अऊ खोर गली जेती मन लागिस घूमते रिहिस। ओला उदूपहा अपन गांवक के पटेल के दरसन होगे। ओहा दौड़िस अऊ ओला धर लिस अऊ किहीस बबा तुमन कब आयेव ? फेर दुलरवा ला ओहा चिन्हेच नई सकिस। कहीस – मेंहर तोला नई चिन्हेंव – तेंहर कौन अस? दुलरवा हा किहिस – मेंहर दुलरवा आंव।

दुलरवा के नां ला सुनेत पटेल के मुंह हा अइला गे। ओला ए दुब्बर-पातर दुलरवा ला देख के सोग लाग गिस। आखिर येहर इहां काय करथे, एला त मनखे मर गे समझथ। पटेल हा दुलरवा ला किहिस – दुलरवा तेंहर इहां ठाड़े हस अऊ ओती त तोर घर हा उजाड़ परगे। का तेंहर अपन घर के जमा झिन ला भूला गे ? तो भौजी हा ये असार-सनसार ले बिदा ले लिस। मेंहर त आज कल इहें रहिथों। जमुना हा मला बताय रिहिस के ओ सुख के घर हा खंडहर परे हे।

दुलरवा हा पटेल के गोठ ला हक्का-बक्का के सुनत रिहिस। ओखर मुंड़ किंचहे लागिस। उही सड़क तीर दुलरवा हा बइठ गे।

पटेल साहेब हा रेंग दिए रिहिस। दुलरवा वा तरसत देख के।

दुलरवा उठिस अऊ सड़क कोती चिचियावत भागिस। भौजी ठाड़ हो, महूं आते हौं... मेंहर तोर बिन नईरहे सकंव। तेंहर मोला छोड़ के चल देय भौजी, फेर मेंहर काबर जियत हौं। का मेंहर ये पीरा ला सहे सकहूं। ओहा अतेक जोर ले भागत रिहिस हे अऊ अतेक भूलागेय रिहिस अबन भौजी के सुरता मां के ओला अतके सोर नई रिहिस के आघू कोती ले मोटर आवत हे। दुलरवा हा जइसने चौरस्ता मां पहुंचित मोटर के छड़ हा ओखर कन्हया मां खुसरगे।

मनखे मन भीड़ एकट्ठा होगे। जोनमन देखिन त देखे नई सकिन। लहू के मारे सड़क हा लहू-लहु-लुरान होत रिहिस। ओला लकर लऊहा अस्पताल पहुंचाइन। उहां दुलरवा के दू दिन सुध नई आइस। जब सुध आइस त ओतका बेर खोली मां बिमरहा मन ला छोड़ के अऊ कोनों नई रिहिन, वोहा ऊहां ले भाग निकलिस।

कइसनो करके ओहा घर पहुंचिस। अरे या काये तारा ? का होगे। का घर मां कोनों नईये, केती चलदिन सब झिन ?

वे हा गौटियां तीर पहुंचिस। कका भइया कहां चल दिस ? ओहा बताइस तोर भइया कहां दूसर बिहाव कर लिस अऊ दूकान ला बैंच के नई जानन केती चल लिस। ओहा घर ला न ई बेचिस। ओहा कहाय के येहर दुलरवा के आय।

दुलरवा हक्का-बक्का हो गेय रिहिस। का लिला ये सनसार के, मोर भौजी मरिस त दूसर तियार, भइया ला घलोक का होगे। का भौजी हा सच काहय के ओमन का करहीं। मोर त सबे कुछु तेंह करबे। तेंहर सच काहस भौजी, इहां सबोच चीज हा फेर मिल जाथे, महूं ये दुनिया में नई रहना चाहंव।

वोहा भटकत नंदिया कोती भागीस। ओहा नंदिया मां जइसनेच गिरे बर करत रिहिस, ओलाअइसे लागिस के पानी मां भौजी के अवाज भरे हे, ओहा कांही काहत हे। दुलरवा तोर भइया हा त मोला भुलवारदिस, तहूं हा मोला भुला देना चाहत हस ? मोर नाव मेटागे दुलरवा... मोर नाव मेटागे।

दुलरवा ठो ठिकिस...। कौन भौजी... मेंहर तोर नाव ल नई मेटावन दंव। जतका खूंट ले मोरले बने सकही “भजी नाव ला अम्बर कर देहों।

दुलरवा हा लहुट आइस। ओहा घर के तारा ला टोर दिस अऊ घर मां रहे लागिस। दुलरवा हा मन मां भौजी के यादगारी मां कांही बनाय के परतिग्या करिस।फेर ओहा पढञे-लिखे त रिहिस नइए। ओहा बनिहार करईच ला बने समझिस, ओला दिन भर जऊन काम मिलय उही ला करय। अपन पेट काट के ओहा पैसा सकेलना सुरु करिस।

थोर-थोर मां तीन बच्छर बीत गे। मिहनत के मारे दुलरवा हा ये तीन बछर मां बने पैसा सकेल डारिस। ओहा मंदिर बनाय बर सुरु करिस। ओला अब अपन जियत रहे के भरोसा दिन-दिन कम होत दिखय। ओखर इच्छा रिहिस के मंदिर हा झट के पूरा हो जातिस। दुलरवा हा रात-दिन बनिहार मन मेंर बुता कराय लागिस।

दुलरवा हा आ गांव के मनखे मन बर अचंभा बने रिहिस हे। ओमन सबो झिन भौजी के मंदिर के बनावब मां मदत करत रिहिन।

दू महिना के अब्बड़ मिहनत करे के बाद ओखर मंदिर बन के तियार होइस। दुलरवा आज बड़ खुस रिहिस। ओहा सब गांव भर के मनखे मन ला नेवता दिस। सब्बो झिन आइन। सब्बो दुलरवा के खुसी मां संग दिन। कोनो मेर नाचा, कोनों मेंर गाना। आज गांव मं खुसीच-खुसीच दिखत रिहिस।

संझा कन कलस चढ़ाय के मुहुर्त रिहिस। दुलरवा ह सब झन ला ब लाइस। बेरा मां सब झिन आगे। ओतके बेर जोर से आंधी आय लागिस, मनखे मन एती ले ओती लुकाय लगिन।

कलस चढ़ाना जरूरी रिहिस, फेर अपन जीव ला कोन चोखिम मां डारय। दुलरवा ला फिकर होगे, का होही ? कलस ला दुलरवा अपनी पीठ मां बांध के डोरी के आसरा मां उप्पर चढ़े लागिस। मनखे मन दुलरवा ला अड़बड़ समझाइन फेर दुलरवा हा नई मानिस, ओहर तढ़तेच गईस। गांव वाला देखत रिहिन एक ठन हाड़ा के सांचा हर ऊपर कोती सरकत रिहिस। मनखे मन भगवान ला मनावत रिहिन के आंधी हा रुक जाय। फेर इहां त आज नर अऊ नरायन मां सरियत लगे रिहिस। दुलरवा उप्पर चढ़गे। ओहा कलसा ला मंदिर मां मढ़इस। मनखे मन जै जैकार करिन, दुलरवा मन मां फूलिस अतेक के नई समाइस। अरे... अरे... काहतेच दुलरवा हा भुंइया मं गिर परिस। आखिरी मां नरायने के जीत होगे। नर हा अपन मुंड़ ला गड़िया दिस।

जौन मेर थोकन बेर के पहिली खुसी मनावत रिहिन, उहें दुख के समुंदर लहराय लागिस। सब झिन कहे लागिन – भगवान बड़े निर्दयी हे। ओहा सब घर भर ला बाराबाट कर दिस।

मनखे मन दुलरवा के किरिया कमरम करिन। एती सोनकुंवर के दुनया उजर गेय रहिस। तभोले ओला आसरा रिहिस के दुलरवा जियत होही। फेर दुलरवा घलोक वो करम-छंड़हीन ला तरसत छोड़ के चल देय रिहिस।

एक दिन रमई कका ला घलोक भौजी के मंदिर के बिसेय मां सोर मिलिस, के दुलरवा ह जियत हे। ओहा मंदिर बनवावत हे। ओहा घर मां किहिस मेंहर काल दुलरवा के गांव जात हंव। दुलरवा उहें हे।

येला सोनकुंवर घलोक सुनिस। अब ओला बोध नइ रिहिस। ओहा रातो-रात अपन जोड़ी मेर भेंटे बर चल परिस।

बिहिनिया होत ओहा गांव पहुंच गे। दुलरवा के मौउत कइसे, काबर होइस, येला सब गांव के मनखे मन सोनकुंवर ला बताइन। सोनकुंवर हा बही मन असन मंदिर कोती दौड़िस। भौजी... भौजी... भौ...जी।

सोनकुंवर गिर परिस। ओखर नांक मां अड़बड़ जोर से परिस। ओखर जीयेच उड़ागे।

गोठ के बीते ले मनखे मन ला रोजेच दिया बरत दिखथे। मंदिर रोजेच सफ्फा रहिथे। ये तीन झन बुताय जीव फेर मिलके एके होगे हे। सच्चा पियार के तीन ठन मोती आज घलोक चमकत हवंय।

अऊ फेर...।

फेर का ? सब गोठ ला त मेंहर बता डारेंव।
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2 comments:

Vedu said...

It is very interesting and touching story. your imagination power is exilent

Vedu said...

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