Wednesday, May 2, 2007

अध्याय - पाँच

डेरहा हा हांत गोड़ धोके रंधनी घर मां जाके बइठ गे। भौजी हा खाय बर परोस दिस। डेरहा हा किहिस – आज तोर संग देवइया नई ये त का मेंहर तो संग दे दंव ? आना आज मैं अऊ तैं एके संग खावन। भौजी के चेहरा मां हांसी खेलगिस। अऊ कहिस – बुढ़वापना मां, का अइसना गोठ हा तोला बने लागथे। डेरहा हा किहिस - का आठे बछर मां मेंहर बुढ़वा होगेंव। तहूं ता का कइथस – कहूं सिरतोनेच बूढ़ापा आ जाही त फेर अइसना दिन देखे बर सपना हो जाही। अरे सुन त – आ ना, आज संगे मां खाबो। दूनों झिन मिल के खाइन पेर भौजी हा सबर दिनेंच दुलरवा संग खावय, तऊन पायेके आज ओला कइसे बेढंग के लागत रहिस हे।

दुलरवा अपन ससुरार पहुंच गे। ससुरार म ओखर बर पहिलीच ले अबड़ेच तइयारी कर डारे रिहिन। दुलरवा के समझ म नई आवत रिहिस के आखिर तार काबर करे गीस बिहाव होय के बाद ओहा पहलीच बेर ससुरार आय रिहिस, तउन पाय के ओला झझक लागय। झझक के मारे ओहा कखरो मेर पूछ बने नई समझत रिहिस अऊ रात कब होही कहिके रथिया के रद्दा देखत रिहिस।

आखिर मां अबड़ेच असकट मां दिन कटिस अऊ रात अइस। खवई पिअई होय के बाद दुलरवा ला एक ठन कुरिया मां अमरा दीन। उहां सोनकुंवर हा अपने देवता के पूजा करे बर पहलीच ले तइयार बइठे रहिस। दुलरवा हा दसना मां बइठतेच रिहिस के सोनकुंवर हा दऊड़ के ओखर गोड़ मां गिर परिस। दुलरवा हा सम्बलिस अऊ उठा के सोनकुवंर ला दसना मैं बैठार लिस। अरे सुनकुंवर तेंहर अइसना काय करत हस। का हो गे हे ? का मोर मोर ले कांहीी गलती होगे हे, का होगे हे बता ना। सोनकुंवर ला अपन ये लेड़गा घरवाला उप्पर रिस लागत रिहिस हे अऊ सोग घलोक। सोनकुंवर हा कहिस – तुमन मोर चिट्ठी के जवाब काबर नई देव। तोट चिट्ठी नई आये ले मेंहर कतेक तरसत रहेंव। मने मन रोवंव अऊ आंखी हा तोर निरमोही के वांव ले के आंसू बोहावत रिहिस। फेत तोला त कभूच मोर सरकता आवत रिहिस ? दुलरवा मन मा गोठिया डारिस – नई सोनकुंवर नई, मेंहर रोजेच तोर सुरता करंव फेर सुरता करे ले का होथे ? मन हा घेरी-बेरी बीते समे ल सुरता देवाय अऊ ओखर मारे मन में दुख के राज हो जावय। मनखे मन घलोक रोनहुत मुंह ला चिन्ह डारंय अऊ ओ मन ला केहे के ओढ़र मिल जाय के एहू का गोठ आय के बिहाव होत बेर नई लागीस अऊ इंखर जकहा पना आगे। इही पायके कांही नहीं कहे सकेंव! अऊ चिट्ठी के जवाब नई देय के गोठ कहेय तब मेंहर चिट्ठई ला कभूच-कभूच लिखथंव। ये तोला जानना चाहि। अच्छा अब रिस ला छोड़ ये त बता के तार काबर भेजे रेहेव। अतका कहतेच सोनकुंवर के मुंह हा हांसी ला नई लुकाय सकीच अऊ ओहा किहिस – सिरतोनेच देंहर निच्चट लेड़गा मुंहा हावस ओ तोला बलायेच बर भेजे रेहे अन। अतका ला सुतेज ओहर लजाय असन हो गे। पेर तभो ले ओहर हार के घलोक जीत गे हवंव समझत रिहिस।

थोकन बेरा ले एती ओती गोठ होत रिहिस। तहां ले नींद आय लागीस, तभो ले सोनकुंवर सुतिस नई, अऊ मुडसेरिया म बइठ के मुंड़ी मां अपन हाथ ला फिरोत रिहिस।

बिहिनिया होगे। सुरुज भगवान हा अपन बेरा मां उगे। दुलरवा हा रोज के काम ले फुरसद हो के बैठका खोली कोती गिस। सोनकुंवर नास्ता के जोख मढ़ावत रिहिस। ओह जाके एक ठिन खउसरी मां बइठ गिस। सोनकुंवर हा दुलरवा के आघू मां नास्ता के मलिया ला मढ़ा दिस अऊ उहू हा एक ठन मलिया ला लेके बइठ गे। दुलरवा ह किहिस – सोनकुंवर अकेल्ला खात-खात अड़बड़ दिग होगे आना आज संग संग खाबो। सोनकुंवर किहिस अऊ कोने आ जाहीं त का कइहीं अरे कोन आही ? अऊ आइच जाही त काय कइही। तेंहर मोर अस के आ जाही तेखर। सोनकुंवर ला हांसी लागिस। दुलरवा हा ओखर हंसई मं संग देय लगिस अऊ सोनकुंवर के फरा मुंह मा पेड़ा ला भर देइस अऊ ओहा दुलरवा के मुंह मा डारिस।

चार दिन ल दुलरवा हा काट डारिस। फेर अब इंहा बने नई लागिस। ओला भौजी के सुरता ह ताला बेली कर देवय। ओला भौजी मेर ले अलगे होय आज चार दिन हो गेय रिहिस। ओहर अपन सारी बिजय ला बला किहिस – कहूं बनय तो सोनकुंवर ला पठो दे अऊ अपन खोली कोती रेंग दिस।

अरे गा होगे, तुंहर मुंह काबर उतरे हे। का हमन ले कांही चूक होगे। दुलरवा हा किहिस – सोनकुंवर आज मोला भौजी के सुरता हा तरसावत हे। मोर आंखी हा ओखर दरसन करे बर तरसत हे। का तहूं हा चलबे। सोनकुंवर हा कुछु नई किहिस अऊ अंखी मं आंसू भरे के भरे बाहिर निकलगे।

माई लोगन मन के मन हा कतेक अपस्वार्थी होथे। ओहर अपन घर वाला ला कभू दूसर औरत के बड़ाई करत नई सुने सकय, ओहा दाई काबर ना होय।

सोनकुंवर उप्पर के पटाव म चढ़गे। ओखर मन मां दुलरवा अऊ भौजी के बिषे म नई बताय सकंव के का-का गोठ आइस। ओला लागिस के मोर दुनिया अब उजड़त हे।

आखरी मां सोनकुंवर हा जाय के फैसला कर लेइस। सोनकुंवर के दाई हा किहिस – बेटी, तेंहर अभी कइसे जाबे। अभी त तोर कुराससुर हा लेवाय के सोर घलोक नई पठोय हे। सोनकुंवर के छाती हा त भरम मां फाटे जात रिहिस। ओहा किहिस – मोला त इन्खर संग रहे बर हे। कुराससुर ले काय मतलब हे।

दुलरवा ला पठोय के सब्बो तैयारी कर देय गीस। रेल के बेरा हा लकठिया गे। रमई कका हा टांगा लान के ठाड़ करिस। दुलरवा हा आघू ले टांगा म चढ़ के बइठगे।
अरे, ये रोवई गवई तेंहर कोनों धुरिहा थोरे जाथस। फेर तभो ले रोवई हा कमती नई होइस। रमई कका हा आंखी के आंसू ला पोछत, सोनकुंवर ला टांगा मां लान के बइठार देइस। टांगा टेसन कोती चल दीस।

रेल एक घंटा पाछू रिहिस। रेल के अबेर होवई हा सोनकुंवर ला नई अखरिस, फेर दुलरवा ला अखरे लागिस। हे भगवान, तहूं मोला पदोवत हस – झट कन मोला मोर भउजी मेर अमरा दे। फेर कहां, दुलरवा घलोक गाड़ी के अगोरा मा एती ले ओती किंचरे लागिस। रमई कका हा सोनकुंवर के लकठा मां बइठ के कांही कुछु फुसुर-पुसुर गोठियावत रहिस।

कइसनों कर के एक घंटा बीत गे। रेल टेसन मां ठाड़ होगे। दुलरवा अपन समान ला एक ठिन डब्बा मां भरिस। गाड़ी मां अबड़ेच लट्ठा रिहिस। अतके के बेठई त कहूं जाय, सामान रखई घलोक मुस्कुल पर गेय रिहिस। रेल हा इहां तीन मिलिट रुकय तउने पाय के एती ओती के कांही सोचब बिचारब ला छोड़ के खिड़की कोती ले डब्बा म समान फेंकई सुरु कर दिच। ओतका बेर डब्बा मा गोहार असन पर गे। फेर दुलरवा के धियान त ओ कोती थोरकोच नई गीस।

हांथ कइसनों कर के समान ला त भीतर मां कर डाहिस। अब एक मुस्कुल त कट गेय रिहिस, दूसर के बेरा होइस। अब बइठे केती जाय। फेर दूसर मुस्कल ला सोनकुंवर हा बना डारिस। अइसे होइस के दुलरवा हर बिचारतेच रिहिस के एक झन भलमानुस हा सोनकुंवर ला किहिस – बेरा तो होगे, चढञ जावना। अऊ ओहा दुआरी मा ठाड़े मनखे मन ला अपन चंघा मां बइठे पर किहिस। दुआरी उघरिस अऊ ओमन खुसर गिन। सोनकुंवर ला त ठउर मिल गे। फेर दुलरवा ठाड़ेच रिहिस। दुलरवा के मने मन हिजगा होत रिहिस हे के जौकी मन मां का बात हे कि उखर सब्बो जघा काम बन जाथे अऊ हमन के नई बनय। कहूं महूं डौकी होतेवं।

दुलरवा अइसने बिचार मां भुलाय रिहिस के रेल हा छुट गे। अऊ तहां ले दुलरवा रेल के रंग ढंग मं भूला गिस।

दुलरवा के टेसन आगे। अऊ दुलरवा दुवारीच ले तुरते भुतिहार मन के मुंड़ मां समान ला मढ़ा दिस। अब ओमन ला उतरई घलोक हा मुस्कल होगे। काबर के बाहर वाला मन भीतरी खुसरे बर अऊ भीतरी वाला मन बाहिर निकले बर, लकपकाय रिहिन। आखरी मां ओमन धक्का खात खाले मां उतरिच गे।

येती भौजी हा दुलरवा के रद्दा देखत रहिस दुलरवा कब आही। आ जा ना रे दुलरवा, मोला तोह अबड़ेच सुरता आवत हे। आज त कौंवा हा छानी म चारा बांटत रिहिस हे। का तेंहर आजो नई आवस ?

भौजी हा दुलरवा के सुरता करतेच रिहिस के टांगा हा दुवारी मां ठाड़ होइस। टांगा के ठाड़ होयके आरो पातेच भौजी हा दुवारी मां पहुंचगे। देखिस के दुलरवा अऊ सोनकुंवर दूनों झन आए हैं। ओला अड़बड़ खुसी होइस। दुलरवा हा टांगावा वाला समान उतारे बर किहिस अऊ अपन हा भौजी के गोड़ा मां गिर गे। भौजी ला देखते ओखर आंखी मां आंसू भर गे। ओहा किहिस के मेंहर तोला देख बर कतका तरसत रहेंव जानत हस ? भौजी हा दुलरवा ला उठा लिस अऊ किहिस अरे, तुलरवा कइसे बैहा हो गेय हस। चल भीतर चल, मेंहर सोनकुंवर ला लेके आवत हंव। दुलरवा सोज अपखोली मां गईस अऊ खटिया मां सुतगे। भौजी हा हांक पारिस – अरे दुलरवा आना भइया रोट खा ले। दुलरवा हा कहिस – आवत हौं भौजी, तहुं अपन बर हेर ले। मेंहर आज रोटी तोरेच संग खाहूं। दुलरवा हा ओन्हा बदल के खाय बर आईस। देखिस के भौजी हा परोस के बइठे हे। बेरा होगे का भौजी। अइसे लागत हे तोला अबडड़ेच भूख सागत हे। भौजी हा किहिस – हहो मोला त भूख लागतेच हे, फेर का तोरपेट मां ससुरार के लपडुआ हा किंचरतेच हे। हहो रे भौजी तेंहा सच काहत हस, पेट ह अब ले फूले हे। आखिर ससुरार के माल ये ना। ले बने हे आ खा ले। पेर लप्हरसी मारबे। अभी सोनकुंवर ला घलोक खवाना हे। दुलरवा हा भौजी के कहे मान के रोटी खाय बर सुरु कर दिस।

जब सबो झिन रोटी खा डारिन तब दुलरवा हा किहिस – सोनकुंवर तंय चल मेंहर अभी भौजी मेर ले आवत हंव। अऊ पेर भइया मेंर घलोक जाय बर हे। सोनकुंवर अपन खोली कोती चल दिस अऊ दुलरवा हा भौजी के खोली कोती। दुलरवा हा अपन भइया डेरहा के पांव परिस अऊ अपन भौजी तीर भूंया मं आके बइठ गे। थोकन बेर ले तह डेरहा हा दुलरवा संग ओखर ससुरार के गोठ करत रिहिस। ओहा तार के बिसे मां पुछिस, तब दुलरवा हबा कांही जवाब नई देइस। लजा के भौजी कोती देखे लागीस। भौजी हा बिन हांसे नई रेहे सकिस कहीस कइसना भाई आव के सब्बो गोठ ल पूछथव, अरे का येहा जम्मो गोठ ला तुमन ला बता देही। डेरहा हा कहिस – ले भई नई पूछंव, मैं त सूतत हौं। हहो दुलरवा तेंहा बिहिनिया दूकान खोले बर चल देबे। मेंहर काली रतनपुर जाहूं।

दुलरवा अऊ भौजी रात के एक बजत ले कोठियावत रिहिन। येती सोनकुंवर ला रिस लागत रिहिस। कइसना नमनसे ये अब लेनई आइस। सोनकुंवर के मन मां पाप आगे। आखिर भौजी ले ओला अतेक मया काबर हे। कहूं कांही अऊ तो नोहय। हे भगवान, कहूं अइसना होईस त मेंहर अपन मइके चल देहूं। अऊ कहूं उंहो नई रेहे सकंव त कोनो सहर मां मास्टरी कर लेहूं। का मेंहर इन्खरे मन आसरा में हों। सोनकुपंवर के धुकधुकी हा बाढ़े लागिस। ओहा उठिस अऊ भौौजी के खोली कोती चलिच जइसने वोरहा दुवारी मं पहुंचिस अऊ उहां जौन देखीस ओहा ओखरमन के गोठ के भरम ला अऊ पक्का कर दिस। दुलरवा हा भौजी के कोरा मां मुड़ला राखे धीरे-धीरे कोठियावत रिहिस।

ठउका रे भगवान तेंहर डउकी मन ला काबर अतेक भरमहीन बना देय। हमन रद जात मन हा अतेक भरमाहा नई होवन। अऊ डउकी मन ला भरम होतीस कोनों अऊ जघा, फेर जऊन दुलरवा हा भौजी ला महतारी ले जादा मया करय तेखर बर, सोनकुंवर के मन मां काबर ठौर देय। का ओहा नई जानय। नई जानय के किवमन के कइस लिख दिन – ‘आंचल में है दूध और आँखों मं पानी’ मेंहर त कहिहौं ‘अंचरा म है भरम, अऊ आंखी मं ओढ़हर।’ अइसना बिचार करइया डउकी मन ये नई समझय के का कभू अइसना होय सकही। महतारी बेटा माँ, भाई बहिनी मं परदा। कमती समझइया आंय ना तऊने पाय के त ओमन ला जिंदगानी बने ढेग के चलाय बर एक सहारा के जरूरत बने रहिथे।

एक बज गे। भौजी हा कहिस – दुलरवा जा सुत एक बजगे। दुलरवा उठिस अऊ अपन खोली कोती चल दिस। अरे ये काये, सोनकुंवर का हो गेहे ? अरे गोठिया न। फेर सोनकुंवर के ससवाई हर बाढ़ते जाय। ओहर कहिस मेंहर अब एक छिन इहौं रहना नई चाहंव। तेंहर अलगे रहिबे त मेंहर रहिहौं, नई त मोला मइके पठोदे। दुलरवा ह ये हाना ला नई समझे सकिस। दुलरवा हा कहिस – आखिर तोला का हो गेहे सोनकुंवर ? सोनकुंवर हा कहिस – कांही त नई होय ये, फेर तोर भौजी संग अतेक मया हा मोला नई सुहावय।

दुलरवा के मुंड़ हा किंजरे लागिस। ओहा लकठा मा माढ़े अराम खुसरी मां बइठ गे अऊ किहिस – सोनकुंवर ये मेर तेंहा भूलावत हस। तोर मन मा जौन बिचार उठे हे ओखर से तोला तोकन बेर बर अराम मिल जाही। फेर जन भर रोय बर परही। फेर तोला मोर बारे मां ठऊका-ठऊका पता नइये। मोर भौजी...। मंझोतेच म सोनकुंवर हा किहिस – मैं सब जानत हौं। तेंहर मोला ठग के गोठ झन कर। दुलरवा ला ये सब सुनई हर अनसहयुक होत रहिस। हे भगवान, कहूं मोर हाथ ये करमछाड़ही ऊपर छूट झन जाय। ओहर उठिस अऊ खोली के बाहिर जाय लागिस। सोनकुंवर हा दुलरवा के हाथ ल धर लीस अऊ गरिस – बने हे तेंह जल दे। पेर अतका सुरता कर ले भैया अऊ भौजी के जायदाद मं मोर जरूर हक हे फेर वोला बांटा करे के नइये।

अध्याय – छह

सोनकुंवर के ऊपर पहाड़ गिर परिस। ओखर मन हा भरभरागे। अपन परोसी मन कोती ले अपन ददा मेंर तार देके बिचारिस। काबर के सोनकुंवर हर पढ़े-लिखे रहिसे, तौने पाके ओला भरोसा रहिस, के ओहर अपन घर वाला ले अलगे रहिके घलोक जी खाही। जिहां ओखर मनखे ह दूसर के चाकरी करत हें। रात-रात भर तरसत रहिस। ओला एकै ठन रद्दा दिखिस के मोर इहां ले चलेच देवई म बने बनही।

येती दुलरवा घलोक रथिया भर नइ सुते सकिस। सोनकुंवर के बिचार ऊपर दुख होवत रिहिस। आखिर पक्का कर डारिस। हे भगवान, मोर अकिल काम नइ करत हे, काय करंव ? ये सबो ह भौजी के मारेच होइस। नई त मेंहर ये झंझट म काबर परतेंव। अभी त बछर दिन घलोक नई पूरे ये अऊ मोला दुिनया म मरे बर परत हे। सोनकुंवर चाहे मोर ले अलगे हो जाय। फेर मेंहर भौजी के जिन्दगानी ले कभू अलगे नई होय सकंव। चाहे मोला कतको दुःख काबर नई झेले ला परय। दुलरवा इही किसम के बिचारतबिचारत सुत गे।

अरे दुलरवा उठ ना, बिहिनिया हो गे ये, का तोला दूकान नई जाय बर हे। दुलरवा उठ त पहलिच ले गेय रहिस, ओहा उही मेंर ले चिचिआइस, आवत हौं भौजी। दुलरवा उतरिस अऊ बिन चहा पिए दूकान चल दिस। अड़बड़ बेरा होय के पीछू सोनकुंवर मेंर भौजी ह पूछिस – का दुलरवा हा अब ले सुतेच हे। सोनकुंवर हा पहलीच ले जरे भूंजाय बइठे रिहिस। ओहर कहिस – नई ओहा तुन्हर चाकरी करे बर गे हे। भौजी हा दंग रहिगे। हे बगवान, ये काये ये, सोनकुंवर अइसना आज काबर कहिस। ओमन धीर धर के कहिस – सोनकुवंर तोला अइसना करू गोठ नई गोठियाना चाही। का दुलरवा हा मोर चाकर आय। अऊ का कमाना हा चाकरी आय, फेर अइसनो त नो हय के दुलरवा च हा कमाथे। उहू मन रात दिन एती-ओती भटकत रइथे। अऊ भौजी हा रो डारिस। सोनकुंवर तोला अइसना नई कहना चाही, अऊ न अइसन बिचारना चाही। आखिर हमन बहनीच त होथेन। अऊ का ये हा बने आय के छोटे बहिनी हा अपन बड़े बहिनी ला बिन सोचे बिचारे कुछ कहि दय। सोनकुंवर मेंहर तोला अपन छोटे बहिनी समझत हौं। हहो कूहं मोर ले सिरतोनेच कांही गोठ हो गे होवय तब कहिबे... सोनकुंवर।

सोनकुंवर त भुंइया म नई रहिस, ओहा त आज बादर ला छू डारे बर चाहत रहिस। ओला डर रिहिस के दुलरवा ला, कोनो ओखर से लूट झन लंय। ओला घरवाला के मया कहूं नई मिलय।

ओहा किहिस – तेंहा का समझतहस, मेंहर उन्खरे सहीं निर-लठिंगरा नई औं। मेंहर तोला बने ढंग ले समझथ हौं। तेंहा मोर ओधा मा अपन सबो काम चलाना चाहत हस। अऊ अइसन रहिस हे त तें हा ओखर बिहाव काबर करे। तेंहा अपन तलब बर मोर जिन्दगानी अबिरथा कर देय।

अब भौजी हर समझगे। सोनकुंवर हा आखिर का कहना चाहत हे। ओहा कुछु नहीं कहिस अऊ अनपन खोली को दुआरी ला देके भीतरी मां जा के बइठ गे।

भौजी ला अबड़ेच दुख होइस। का ये सबो बने होत हे। दुलरवा त मोला महतारी कहिथे फेर नई अब मेंहर ओला कोनो हालत मां अपन संग नई राखे सकंव, चाहे काहीं हो जाय। मेंहर त ये मया मां त सरग-नरक दूनो ले चल देहों। भौजी हा ठान लिस के अब दुलरवा संग मां नई रेहे सकंव।

संझा होइस दुलरवा घर पहुंचिस। अरे भौजी, कहां हस, आज अब ले दिया नई बारे गेय हे ? का बात ये ? अरे भौजी केती हस। दुलरवा हा सब्बोक खोली मन ला देख डारिस फेर ओला सिरिफ सोनकुंवर हा दिखिस। दुलरवा हा पूछिस – भौजी कहां हे ? सोनकुंवर हा भौजी के नावेच मां उफना गे। का मेंहर घर के रखवार अंव, जेमा जानत रहेव के कोन केती हे अऊ कौन नई ये ?

दुलरवा हा हकबकाय ठाड़े रहिस। ओहा अपन खोली के कंडिल ला बारिस अऊ ओला धर के भौजी के खोली कोती गईस।

अरे भौजी, का हो गेय तोला, जऊन आज अपन दुलरवा ला बिन खवाय सूतत हस। भौजी हा काहीं निही गोठिआइस। अरे भौजी, गोठियाना का होगे हे।

भौजी हा अपन मन ला पथरा करके कहिस, दुलरवा तेंहर का मोला जियन नई दस।

काबर भौजी, दूसर के जीव देवइया के जीव ला कोनों काबर मांगही। अरे भौजी, कहूं तैं काहस अऊ भगवान हा मोर सुनय त मेंहर अप जिन्दगानी के एक-एक सांसा तोला दे दंव। फेर थोकन मेंहर अपने बर जरूर राख लेहूं, तेमां मरे के बेरा अपन भौजी के दससन करे सकंव।

भौजी हा दुलरवा के गोठ ला सुनके बिचापर मां उबुक-चुबुक होय लागिस। का दुलरवा हा मोर पथरा असन गोठ ला सुने सकही, अऊ का मेंहर कहे सकिहौं, तभो ले कहेय बर परही, ओमन सुनहीं त क कहहीं।

दुलरवा सुन, आज मेंहर तोर ले आखरी बखत एक ठन भीख मांगत हौं।

का भौजी तेंहर मोर दरिद्दर मेंर भीख मांगत हस। अरे हुकूम दे अपन बेटा ला।

दुलरवा मेंहर तोह महतारी अंव, ऐला तेंहर मानथस ना।

हहो काबर नई, एला त त गाँवभ जानत हे।

त मोर मन हे के तेंहर अपन ये महतारी ला कंलक लगब ले बंचा ले।

भौजी तोर असन बने, मयारुक अऊ सुग्घर चाल वाली ऊपर कलंक लगाय के काखर सकती हे्। सुरता राख भौजी तोर ऊपर कलंक लगवइया ला मेंहर त, मोला समझथस ना भौजी।

हहो दुलरवा, मेंहर समझत हौं। फेर मोर ऊपर कलंक लगवइया हर अपनेच आय तऊन पाय के ओला कांही कहवई सुनई हर बने नोहय। तैं नई जानत अस के आज तोर कारन मोर कतेक हिंता होइस हे। मोला त कोनों ला मुंह देखावब घला हा मुस्कुल होवत हे।

दुलरवा हा ननइक लइका- गढ़न रोवन लगिस, अऊ भौजी के गोड़ मां मुंड़ ला मढ़ा के कहे लगिस। भौजी कहूं मोर नांव लेके तोर हिंता होय रे त तेंहर मोला जऊन चाहथ सजा दे सकत हस।

दुलरवा के आंसू बूंद-बूंद बोहावत जात रिहिस हे। वोहा रुकतेच नई रहिस। जइसे समुन्दर ले अलग होवई ला नदिया हा नई सके सकत ये। ओहा मिले के आसरा मं बोहात जात होवय।

दुलरवा मेंहर चाहत हंव के तेंहर अब अपन घर ला अलगे कर ले। दूकान मां करहूंतें चाहस त अपन भइया के संग रहि सकत हस। फेर मोर संग अब कांही नता झन राखबे।

दुलरवा के कलेजा धकधकाय लगिस, मुंड़ ह किंजरे लगिस। ओहा कांही बिचारेच नई सकिस, ये का होगे अऊ का होही।

दुलरवा ह कहिस – भौजी तेंहर अइसना काहत हस जऊन हा मोला बिसवास देवाय रहे के दुलरवा मैं तोला अपन जीयत ले अलग नई करंव... भोजी तोला मोर दुलरवा के किरिया हे, मोर से का गलती होय हे... भौजी बता ना ?

दुलरवा हा नीनइक लइका असन भौजी के गोड़ मां परे-परे सुसकत रिहिस। अऊ भौजी के करेज्जा के कुटका-कुटका होत रिहिस। हो भगवान! तैं आखिर काय चाहत हस, बता दे ?

दुलरवा त कांहीच नई समझे पात रिहिस। ओला भौजी के हुकुम मानई जरूरी रहिस। दुलरवा हा भौजी के मान राखे बर अलगे रहवई ला ठऊका समझिस।

संझा होइस। डेरहा भइया घर आइस। ओला घर के रंग ढंग हा आज उपपुटांग लागिस। ओमन हांक पारिन – अरे दुलरवा, तोर भौजी कहाँ है ? दुलरवा ए दुलरवा... अरे तोला का होगे ?

भौजी हा कहिस – कांही नहीं, चलव खायबर परस देथंव।

का दुलरवा हा खा डारिस ?

मैं नई जानंव।

डेरहा ह फेर हांक पारिस – दुलरवा ए दुलरवा... ओती ले काहीं जवाब नई आइस त डेरहा हा भौजी ला कहिस – देख त दुलरवा हे धन नई ये। मोर बलाय ले त ओला अब ले आ जाना रिहिस।

भौजी मन के धुकधुकी बाढ़े लागिस कहूं दुलरवा... नइ ये, अइसना नई होय सकय। भौजी हा दुलरवा के खोली कोती गईस – दुलरवा ए दुलरवा... कोन सोनकुंवर, गा होगे... दुलरवा कहां हे ?

सोनकुंवर के घेंच हा रोत-रोत बइठ गेय रिहिस हे। कहिस दीदी, मैं नहीं जानंव ओमन कहां चल देय हें। मेंहर त समझत रहेंव के अब ले ओहर तुंहरे तीर होंही।

हे भगवान! ए मेंहर का कर डारेंव... अरे देखव त दुलरवा घर में नई ये, कहां गय ?

डेरहा हा कहिस – आ जाही, बइठे होही कोनों मेर। ओला भात ता खा लेना रिहिस।

भौजी हा कांही नई केहे सकीस। ओखर मन मां त धुकधुकी माते रिहिस। हे भगवान! मेंहा का कर डारेंव। भौजी.... अरे कौन दुलरवा, कहां गेय रेहे रे ? मेंहा त समझत रहेंव के मोर दुलरवा हा छोड़ के चल दिस...। नई दुलरवा तेंहा अइसना नई करे सकस। तेंहा मोह बिन कहूंच एक छिन नई रेहे सकस।

दुलरवा के भौजी का होगे दुमन ला, का मोला खाय बर नई दस।

भौजी हा जइसे जागिस... हहो! हहो आवथंव। भौजी हा डेरहा ला खाय बर परसिस... फेर खर मन हा दुलरवा बर छटपटावत रहिस, जइसे गाय हा अपन बछरू के नई दिखे ले ओखर बेचैनी मां गररैया देत होय। फेर भौजी हा त चिचिआय घला नई सकय।

ऐती दुलरवा हा मन मां उदास, हार मान के रथिया घर लहुटिस। बखरी के दुवारी बंद रिहिस। मन मां बिचारिस – काबर मंही कोनो कोती चल दंव – हहो मोर जवईच हा बने होही... फेर का मेंहर कभू अपन भऔजी के दरसन करे सकहूं... नई। काय करंवु... कांही बुझ नई परत ये। दुलरवा ला चक्कर आय लगिस अऊ उही मेर भुंइया मं गिर गे।

दुवारी के धक्का ला सुन के भौजी उठिस... सुनत हव, कोनो अभीच्चे दुवारी ला धकियावत रिहिस हे... उठव ना। डेरहा के नींद हा भन्नाय रिहिस। ओहर कहिस जाना दुलरवा आय होही। मोला सुतन दे।

भौजी उठिस अऊ ओहर कपाट ला उघारिस... अरे दुलरवा का होगे तोला बोलत काबर नई अस... दुलरवा अरे आवव ना, दुलरवा बिहुस परे हे... भगवान जानय कहां के नींद आय हे, अरे सुनत हौ।

ये कड़बड़ई चिचयई के गोहार ला सुन के डेरहा उठ गे। काये ? अरे दुलरवा का होगे – देखत का हस उचा ओला भीतर लेग चल।

भौजी अऊ डेरहा दुलरवा ला उठा के भीतरी मां लेगिन। डेरहा डाग्डर ला बलाय बर दंवड़िस। ऐती सोनकुंवर घलोक चचयई के गोहार ला सुन के आगे। ओहर दुलरवा के गोड़तरिया कोती ब इठ गे। काबर के सिराना मां बइठ के भौजी हा दुलरवा के मुंड़ ला दुलार कर के हाथ किंचारत रिहिस।

सोनकुंवर के मन हा भीतरे-भीतरे जलकुकड़ई के आगी मा बरे लगिस। एती त तुलरवा के तबियत बने नई रिहिस अऊ अइसनों मां घलोक सोनकुंवर के जलकुकड़ई। हे भगवान! तेंहर डउकी मन के मन मां ये काय भर देय। ओला बने खराब काहीं के चिन्हारी नई राहय। येहा बने आय के डउका मेंर डउकी के रहना जरूरी हे अऊ ओला रहिना भी चाही, फेर येह त बने नोहय के ये नाजुक बेरा म इर्सा करे लागय। फेर मोला त अइसे लागय के सोनकुंवर के खराब दिन आगे रिहिस। तऊने पायके त अइसना बेरा म घलोक ओखर मूंड़ मां रिस आऊ जलकुकड़ई के भूत चघे बइठे रिहिस।

अध्याय - सात


डेरहा डाग्डर ला लेके आइस। डाग्टडर हा देख के किहिस, के डराय के काहीं बात नइये। गरमी के मारे होगे हे, एला कोनो किसिम के दुख नई होना चाही। ओखर धुकधुकी हा कमजोर पर गेहे।

दुलरवा के तबियत सुधरे लगिस। ओखर पूरा-पूरा बने होय बर एक महीना लागगे। भौजी हा एक महिना ले दुलरवा के अबड़ेच सेवा करिस, फेर ओहर सोनकुंवर ला अखर गे। ओला अइसे लागिलस के अब ओखर कांही जरूरतेच नई ये। ओहा अपन मइके मं तार भेज दिस। मेंहर आय चाहत हंव। मोर मन उदास रहिथे।

सोनकुंवर के ददा आइस अऊ सोनकुंवर हा अपन मइके चलदिस। घर मां डेरहा ला छोड़ के कखरो मन नई हिरिस के सोनकुंवर हा अपन मइके जावय, फेर सोनकुंवर हा चलदिस।

एती दुलरवा हा फेर अपन बूता सम्हारै लागिस। दुलरवा के चिट्ठी लेखे उपर ले घलोक कांही जवाब नई आइस। दुलरवा समझगे ओहू हा चिट्ठी लिखई ला बने नई समझिस।

भौजी ल सोनकुंवर के जवई के बड़ दुख रिहिस। ओखर मन हा उतास राहय।

अरे भौजी कहां हस... आ हा... आज बर झट के मिल जाही। का बात ए ? अऊ उहू हा अतके झटके... ओहा जऊन पिड़हा मां भौजी बइठे हिरिस तौने मां एक कोनटा मां बइठगे।

भौजी हा कहिस चल रे, तेंहर बड़ दुष्ट हस, छुआ-छूत्ती काहीं ला नई जानस, कहां न कहां ले घूम के आय अऊ रंधनी मां खुसरगे।

दुलरवा हांसे लागय अऊ भौजी घलोक हा ओखर उपदरवी सुझाव के मारे अपन हांसी ला नई रोके सकिस।

दुलरवा ला रंधनी घर मां बइठेच-बइठेच अड़बड़ बेर होगे त भौजी हा झगना के कहिस – कस रे दुलरवा दूकान नई जाना ये कारे ? तेंहर त अब बिन संसो के होत जाथस, तोला अपन आघू मां दूसर के संकोच नई ये।

दुलरवा हा किहिस – तोला का हिजगा होथे, मेंहर त अपन भौजी तीर बइठे हौं।

भौजी काहय बड़ आय हस भौजी वाला, अरे जाना तोर भइया अकेल्ला होही।
हहो जात हौं। अऊ दुलरवा मुंह ला मटकावत चलदय।

तुलरवा अऊ डेरहा संगे रथिया घर आगे। डेरहा खाके अपन खोली मां अराम करत रिहिस। ऐती दुलरवा अऊ भौजी दूनो खाके उठिन। आगू भौजी पाछू दुलरवा दूनोच खोली मां पहुंचिन।

भौजी हा गिरीस – दुलरवा तेंहा जा, मोला आज अबड़ेच जोर के नींद लागत हे।

दुलरवा गरिस – फेर भौजी मोला ता नींद नई आत ए।

कस रे तोला नींद नई लागत ए त का महूं जागंव, नई बबा तें जा में त सुत हूं। अतका कहिते कहत भौजी अपन खटिया मां बइठगे। फेर दुलरवा गईस नई, उहू हा भुंइया मेर परे पोता मां बइठ गे।

भोजी हा चुगली करे असन कहिस – देखव त, दुलरवा हा नई मानत ए – मोला ऐखर चाल, बने नई लागय।

डेरहा हा कहगिस – भई येहा तुंहर रोज के गोठ आय। ते जान अऊ तोर दुलरवा।

आखिर भौजी ला बइठे बर परय। दुलरवा अऊ भौजी ओतेक बेर ले गप्पा छाड़त राहंय जबले डेरहे के नाक नई बाजे लागय।

सोनकुंवर के चल देय ले घलोक दुलरवा मां कांही फरक नई आइस। त का ओला सोनकुंवर के जरूरत नई रिहिस ए, रिहिस ए, काबर नई रिहिस हे।

ओहा चाहय अपन सोनकुंवर ला। ओला सोनकुंवर के जरूरत रिहिस हे। ओहा मया करय सोनकुंवर ला फेर पहिली भौजी तब सोनकुंवर। फेर सोनकुंवर अइसना नई चाहय। ओखर कहना रिहिस के तें मोर अस, अऊ तोला मोर रहना परही।

सोन कुंवर चल त दिस। फेर ओला उहों अराम नई मिलिस। ओहा रथिया चमक जाय। दुलरवा ओखर मन मां रस बस गेय रिहिस। ओहा फेर लहुट जाय के मन करय। फेर ओखर अपन गुरूर जाग जाय अऊ ओला लागय के ओखर देवता हा ओला लेगे बर जरुरे च आही।

सोनकुंवर ला जाय तीन महिना जगर हो गेय रिहिस। अब त दुलरवा के चिट्ठी घलोक नई आवय। ओला बिस्वास होय लागिस के ये सब्बो हा भौजी के चाल आय। ओखर मन मां फेर उही बड़ोरा आय लागय। अऊ ओहा बिचार के समुन्दर म उड़ाय लागय।

कहूं भौजी हा अपन बदनामी के डर मांच दुलरवा के बिहाव करिस हे। हे भगवान! कहूं ये हा सच होही त मोर जिंदगानी ही जरतेज जरत बितही।

एती दुलरवा के मन मां का गुजरिस, ओहू हा उदास रेहे लागिस। भौजी हगा ओला रोज टोकंय। अरे दुलवरा जाके ले आन ना बहु ला। काबर तैं मोर पीछू हाथ धोके परे हस। मेंरह जानत हंव अऊ समझत हौं के तेंहा मोर बेटा अस। फेर तेंहर ऐला नई जानस का, के येहर समाज मां गोठियास के गोठ हो जाही।

भौजी के ये गोठ ला दुलरहा नई सुने सकीस, ओला अन-सहऊ होगे। ओखर मन हा चिचिया डारिस भौजी... तेंहा मोर जिंदगानीच ला बदल देय। काबर करे मोर बिहाव भौजी... काबर करे...। फेर भौजी अतका खियाल राहय के मेंरह अपन भौजी ला कभूच दुख नई देय सकंव। तेंहर जानत हस सोनकुंवर हा काबर गईस हे ? ओहर चाहत रिहिस हे के मेंहर ओखर संग नवां घर बनावंव। भौजी मेंहर पहिलीच कई घांव केहे रेहेंव के मोर बिहाव झन कर, फेर तोर मारे काहींच नई चलिस...।

दुलरवा रो डारिस, भौजी मोला सोनकुंवर ले जादा तोर जरूरत हे। कहूं तहूं मोला नई पूछे त त दुलरवा कोनों मेर के नई रहही। फेर तेंहर उही समाज के रोना रोत हस। तेंहा डराथस काबर। ये लठगरा समाज ले, एखर त कामेच आय बनेला बिगाड़ना, अऊ िबगड़े ऊपर ले ठाड़े-ठाड़े गम्मत देखना। मेंहर अइसना समाज उप्पर थूकथंव, जेंहर सांप बरोबर फेन निकाले दांव देखत रहिथ। एहर उही समाज ए ना जौन हा मोला हीन समझय अऊ मेंहर बेवांरस मन के संग मां बेवांरस बने येती ले ओती फिरंव। ओ बखत तुंहर ये जलकुकड़ा समाज हर कहां चल देय रिहिस। कौन नई जानत ए के तें अऊ भइया घलोक मोर कोती नई नहारतेव त आज मेंहर चोर, डाकू अऊ नामी गु्डा बन गेय रहितेंव। तभो त समाज हर तुमन ला अंगरी देखातिस अऊ कहितिस अरे इही हर ये भलमानस के लोफ्फर भाई, जेर बेवांरस मन के संग मां गली-गली किंचरत रहिथे। भौजी तोला समाज ला देखना हे त मोला छोड़ दे।

भौजी हा दुलरवा ला छाती मां लगा लिस। दुलरवा मेंहर तोला अलग नई राखे चाहंव। तेंहर मोर बेटा अस अऊ मोरेच रहिबे। फेर तोला मोर किरिया हे तेंहर सोनकुंवर ला ले आन, मेंहर अतकेच चाहत हौं।

दुलरवा हा फैसला करिस के ओहर सोनकुंर ला आने बर जाही, अपन भौजी बर।

दुलरवा हा भौजी के केहे मुताबिक सोनकुंवर ला आने बर चलीस। गाड़ी के आवाज मां ओहा किव मन कस बिचार मां बूड़ गे। के भगवान। डउकी के मन मं जऊन मया के ढेरी भरे हे तऊन का मोर सोनकुंवर के मन मं नई ये। सोनकुंवर हा कतेक नासमझ हे, अरे काहीं त सोंचतिस... कहूं भौजी नई होतिस त मोर ये गोसइंया कहथय तऊन दुलरवा जऊन आज हावय तऊन नई रहितिस। अइसने बिचार मां फन्दे-फन्दे ओहा अपन ससुरार पहुंचिस। दुलरवा ला आय देख के घर के सब्बो झिन खुसी होगे। सोनकुंवर घलोक अड़बड़ खुस रिहिस फेर, तिरिया चरित्तर के मारे ओहा दुलरवा कोती लहुट के नई निहारिस। दुलरवा कोती धियाने नई दे रहिस।

रतिया होइस दुलरवा के सुते के बन्दोबस्त करे गईस। खा-पी के दुलरवा सोज अपन खोली मां गईस अऊ खटिया मां पर गे। खटिया मां परते ओला नींद आय लागिस। रद्दा के थकासी ह ओला सुताइच दिस। ओला सुतत देख के सोनकुंवर हा आके लहुट के चल दिस।

बिहिनिया दुलरवा 6 बजे उठ जाय फेर ससुरार के नींद आज ओहा 9 बजे उठिस, ता ओहा देखिस लकठा मं माढ़े कुसरी मां बइठे सोनकुंवर हा कांही पढ़त रिहिस हे। ओहा अपन रोज के आदत परे रिहिस तइसने कहिस – हे भगवान आज के दिन हा कइसे कटही। फेर सोनकुंवर घलोक ठगा जाय तइसना नई रिहिस। कहिस – हहो बने आय, ऊहां बिहिनिया ले अबन भौजी के दरसन करत रहे, इहां त मेंहर तो कालेच आंव।

दुलरवा किहिस – देख लेय न, बिहिनिया-बिहिनिया ले झगरा हे भगवान! ये देबी मन ले बचाबे, अऊ अपन रोज के बूता मां लग गे।

नहाई धोवई ले फुरसत होके दुलरवा हा अपन खोली मां ओन्हा बदलत रहिस के ओतका मां सोनकुंवर हा चहा नास्ता धर के आ पहुंचिस।

चाय के आनन्द लेत-लेत दुलरवा हा किहिस – मेंहर तोला लेय बर आय हौं। भौजी हर तोर अड़बड़ सुरता करथे। हमन ला आजेच जाय बर हे।

सोनकुंवर किहिस – हहो बने ये, थोक बहुत आपमन सुरता करथव, अऊ थोक बहुत तुम्हर भौजी हा। फेर मोला त ओ घर मां गोड़ नई दना ये अऊ कहूं जबरदस्ती करबे त मेंहा त नई फेर मोर मुदार् हा उहां जाही।

तभी त बड़, बड़े ज्ञानी, किव अऊ साहित्त के धुरंधर मन घलोक माई लोगन ला नई समझे सकिन। पेर ये दुलरवा हा त एक अनाड़ीच सरिख रहिस हे।

सोनकुंवर के एक गोठ मां दुलरवा हा चमके बरोबर होगे। ओखर दिमाक काम नई करिस। आखरी मां येहर मोरे गोसईनेच आय, मोला येलाअपन जिंदगानी मोरच संग बिताना हे। तभो ले अभी ओला काहीं नई कहनाच ला ठीक समझिस।

मंझनिया दुलरवा हा कोनो ला कांहीच बताय बिन टेसन चल दिस। जतका बेर ओहा घर ले बाहिर निकलत रिहिस त दुवारी मां ओखर सारी श्यामा हा पूछिस – भांटो अभी कहां जाथस ? दुलरवा ह कहिस – कहूं नई जांव, थोकन किंजर के आवत हौ।

टेसन पहुंच के दुलरवा ह अपन घर के टिकिस कटाइस अऊ गाड़ी मां चढ़गे। रेल मां भीड़ अड़बड़ रिहिस। जौन डब्बा में दुलरवा चढ़िस तउनों मां अड़बड़ गरदी रिहिस। फेर दुलरवा ला ठउनर िमल गे। दूसर टेशन मां दुलरवा ला अपन जघा ला छोड़ना परिस। काबर के ये टेसन के चढइया मन मां एक झन डोकरी रिहिस, जेकर देंहा हा कांपत रिहिस। दुलरवा हा ओला अपन ठौर मां बइठार दिस अऊ अपन हा डब्बा के दुवारी मां चढे उतरे के लोहा के डंडा ला धर के ठाड़ होगे।

दुलरवा ला चैन नई रिहिस। ओखर मन हा ओला भौजी अऊ सोनकुंवर के बिसे मां बिचारे बर पेलत रहिस हे। ओहा अपन मन मां ओ दूनों के बिसय मां बिचारत रहिस हे।

एक कोती सोकुंवर अऊ, दूसराकोती भौजी। सोनकुंवर हा अलगे रहे के फैसला कर डारे रिहिस अऊ भौजी जऊन हा सोनकुंवर के नई आय के मारे समाज के हिंता के सिकार होत रिहिस।

अइसने बिचारत-बिचारत दुलरवा के करेजा हा धड़के लागिस। अऊ वइसनेच गाड़ी हा पुलिया मं आइस ओखर धड़धड़ आवाज मां दुलरवा हा अपन मन ऊप्र कब्चा नई पाय सकिस। ओखर हांथ हा दरवाजा के डंडा मेंर ले सरक गे अऊ ओहा रेल ले गिर परिस।

अध्याय -आठ


एती संझा घलोक दुलरवा हा घर नई पहुंचिस त रमई कका हा दुलरवा के घर तार भेजिस के दुलरवा के कहूंच पता नई चलत ए। कहूं उहां चल दिस होही त हमला झटकन खबर करव।

इहां रथिया तार पहुंचिस। दुलरवा के भइया ह तार पढ़िस अऊ सन्न खा के रहिगे।आखिर दुलरवा गइस कहाँ य़ कहूं ओहा कांही उटपुटांग त नई कर डारिस। ओहा अपन खोली मां पहुंचीस। दुलरवा के भौजी जाग गेय रिहिस। ओहा पूछिस – कहां के तार आय ? फेर डेरहा अभी बताइला ठउका नई समझिस अऊएती ओती के कोठ मां ओला टरका दिस। काबर के ओहा जानत रिहिस हे के दुलरवा ह जतका येला चाहथे तेखर ले कतको जादा येहा दुलरवा ला चाहथे। तउने पायके ओला बताना ठउका नई समझिस।

बिहिनिया डेरहा हा पूछिस अरे सुनत हस ? दुलरवा ह कबले आहूं केहे रिहिस ?

भौजी हा कहिस – भई ससुरार गेय हे अऊ ओहू मां कोसईन ला लेवाय बर, दू-चार दिन रहिके लहुट आही... आवन त दे ये बखत मजा बता हौं बाबू के, मोला आने जाथे त एक दिन दुभ्भर होजाथे बाबू ला, बने हे, आवन त देव।

संझा होइस। भौजी ह दुवारी मां टांगा ला ठाड़ होत सुनिस अऊ झटकन परदा के ओघा ले टांगा कोती छांके लगीस। फेर दे काये... रमई कका... अकेल्ला ? रमई कका ला अकेल्ला आय देख के भौजी के मन मां रंग-रंग के बने अऊ असुगुन बिचार हा आय लगिस। फेर ओहा अपन ला संभारिस अऊ रमई कका के संग भीतर मां आ गे।

भौजी हा पुछिस – दुलरवा काबर नई आइस ? अतका के सुते रमई कका के हुस उड़ागे, ओखर डोकरा आंखी ह रो डारिस। ओहा गित आंसू ला रोके के अनसकऊ कोसीस करत किहिस – ऊंखर त आज तीन दिन ले पता नई ये!

भौजी के छाती हा धड़के लागिस। हे भगवान! कहां गे मोर दुलरवा हा ? भौजी चिचिया जारिस – दुलरवा का तेंहर मोला छोड़ के... नई तेंहर अइसना नई करे सकस... मेंहर तोर महतारी अंव ना... तेंहर मोला छोड़ के नई जाय सकस, दुलरवा... तैं मोला छोड़ के नई जाय सकस।

भौजी अतेक बेहुस होगे के ओला अतको हुस नई रिहिस के ओमेर दुलरवा के भइया घलोक ठाढ़े हे। ओहू अपन आंसू ला नई रोके सकिस। ओमन भौजी ला समझाइ तेंहर संसो झन कर दुलरवा हमन ला छोड़ के नई जाय सकय। मेंहर आजेच गजट मां छपवा देथंव। हमर दुलरवा आही, अऊ जरूर आही।

आज चार महिना होगे, दुलरवा के कहुंच पता नई लगे सकिस। कतको कोसीस कर डारिन फेर आखिरी मां फल कोन्हों नई निकरिस।

अब बस्ती के सब झिन के मन मां दुलरवा बर मया भरा गेय रिहिस। जौन मेंर देखव दुलरवा के गोठ, मनखे मन काहंय के सच ये दुलरवा के राहत ले ये घर मां चारों पहर आनंद छाय राहय। फेर आज उहां चारों कोती दुखे-दुख के राज होगे हे। भगवान ये घर के खुसी ला वापिस कर दे। फेर जहाँ ले ओ निर्दयी हा रिस जाथे तब कखरो मनाय ले नई मानय।

एती रमई कका के घर पहुंचत ले सोनकुंवर के मन हा उदास हो गेय रिहिस। ओहा अपन करनी ऊपर पछतात रिहिस। ओला अपन चारों कोती अंधियार दिखत रिहिस। फेर उही हाल रिहिस के “अब पछताय ले का होथे, जब चिरई चुग दिस खेत”।

एती दुलरवा के गंवाय के बाद ले भौजी हा खवई पीयई ला छोड़ देय रिहिस। डेरहा हा लाख बेर समझाइस फेर तभो ले बने ढंग के बेरा मां नईच खाइस। भौजी हा अपन ला कुलटनहीन समझे लगिस। मंही दुलरवा ला खा डारेंव। ओला कभूच अराम ले नई राहन देंव। भौजी दिन-दिन कमजोर होत गईस अऊ एक दिन ए मिटइया संसार ले बिदा ले लिस।

डेरहा हा भौजी ला बचाय बर सबो करिस। आघिर मां ओखरो हार होगे।

दुलरवा रेलले गिर के घलोक नई मरे सकिस। फेर जी के घलोक कोनो ला नई जानन दिस के ओहा जियत हे। ओहा गजट पढ़ डारे रिहिस। ओखर जी हा भौजी के दरसन करे बर छटपटा जावय। फेर ओहा नई चाह के मोर मारे भौजी ला समाज मां बदनाम होय बर परय।

भौजी के मरे के हाल सोनकुंवर मेंर घलोक भेजे गिस। ये सोर ला पातेच सोनकुंवर हा अपन मुंड़ ला पबीट डारिस। हे भगवान। तेंहर मोला काबर ओ हासत खेलत घर के सतनानास करे बर पठोय। तेंहर मोर मन मां, मोर मां काबर अइसना संसो आने। ओला अपने ऊपर घिनघिन लागे लागिस। ओहू हा अपन मन के उठत आंधी ला नई रोके सकिस। ओहा गोहार पार के रोय नई सकत रिहिस। काबर के ओहर रोतिस त ओहर चोचला असन लागतिस। पहली सोनकुंवर हा भौजी के मनमाने हिंता करे रिहिस। ओमन सब झिन काय कहहीं। सोनकुंवर के मन मां उदासी हा डेरा डार दिस। ओहा दिन-िदन अकेल्ला रहे लागिस अऊ ओला अकेल्ला रहई हर सुहाय लागिस।

अब सोनकुंवर जब अकेल्ला मां बइठय त ओला आइसन लागदय के भौजी हा ओखर आघू मां आके ठाढ़े हगोगेय हावय अऊ काहत हे... के सोनकुंवर तेंहर मोर दुलरवा ला संभाल ले.... देख ना ओहा केती-केती भटकत हे। सोनकुंवर हा चिचिया डारय। हे भगवान मोला भौजी मेंर भेंट कहा दे अब मेंहर ओखर बिन नई जीये सकंव ?

एती दुलरवा बाहिर राहत चार महिना बीत गेय रिहिस। ओहा अब भौजी के दरसन करे बर तलफत रिहिस। ओहा एक छिन बितावब हर मुस्कुल होत रिहिस। ओखर मन मां का जनी कइसे होत रिहिस। फेर का करय। ओहू ला चुप्पे चुप रहवई हा भावत रिहिस हे। फेर बिन भौजी के दरसन करे ओहा मरना घलोक नई चाहत रिहिस। ओखर सब ले बड़का साध रिहिस के मरे के पहिली भौजी के जरूर दरसन करही।

फेर ओ करमछइड़हा का जानत रिहिस के गे ओखर भौजी हा एक महीना के आघूच चल दिस हे... ओला इही सनसार मां तलफत छोड़ के। वो हा जऊन भौजी के दरसन करना चाहत रिहिस हे ओखर छांव के दरसन घलोक मुस्कुल रिहिस हे।

एक दिन दुलरवा के जी हा अतेक हड़बड़ाय लागिस के ओला अपन अकेल्ला मां रहय घलोक बने नई लागिस। ओहा सड़क, बाजार अऊ खोर गली जेती मन लागिस घूमते रिहिस। ओला उदूपहा अपन गांवक के पटेल के दरसन होगे। ओहा दौड़िस अऊ ओला धर लिस अऊ किहीस बबा तुमन कब आयेव ? फेर दुलरवा ला ओहा चिन्हेच नई सकिस। कहीस – मेंहर तोला नई चिन्हेंव – तेंहर कौन अस? दुलरवा हा किहिस – मेंहर दुलरवा आंव।

दुलरवा के नां ला सुनेत पटेल के मुंह हा अइला गे। ओला ए दुब्बर-पातर दुलरवा ला देख के सोग लाग गिस। आखिर येहर इहां काय करथे, एला त मनखे मर गे समझथ। पटेल हा दुलरवा ला किहिस – दुलरवा तेंहर इहां ठाड़े हस अऊ ओती त तोर घर हा उजाड़ परगे। का तेंहर अपन घर के जमा झिन ला भूला गे ? तो भौजी हा ये असार-सनसार ले बिदा ले लिस। मेंहर त आज कल इहें रहिथों। जमुना हा मला बताय रिहिस के ओ सुख के घर हा खंडहर परे हे।

दुलरवा हा पटेल के गोठ ला हक्का-बक्का के सुनत रिहिस। ओखर मुंड़ किंचहे लागिस। उही सड़क तीर दुलरवा हा बइठ गे।

पटेल साहेब हा रेंग दिए रिहिस। दुलरवा वा तरसत देख के।

दुलरवा उठिस अऊ सड़क कोती चिचियावत भागिस। भौजी ठाड़ हो, महूं आते हौं... मेंहर तोर बिन नईरहे सकंव। तेंहर मोला छोड़ के चल देय भौजी, फेर मेंहर काबर जियत हौं। का मेंहर ये पीरा ला सहे सकहूं। ओहा अतेक जोर ले भागत रिहिस हे अऊ अतेक भूलागेय रिहिस अबन भौजी के सुरता मां के ओला अतके सोर नई रिहिस के आघू कोती ले मोटर आवत हे। दुलरवा हा जइसने चौरस्ता मां पहुंचित मोटर के छड़ हा ओखर कन्हया मां खुसरगे।

मनखे मन भीड़ एकट्ठा होगे। जोनमन देखिन त देखे नई सकिन। लहू के मारे सड़क हा लहू-लहु-लुरान होत रिहिस। ओला लकर लऊहा अस्पताल पहुंचाइन। उहां दुलरवा के दू दिन सुध नई आइस। जब सुध आइस त ओतका बेर खोली मां बिमरहा मन ला छोड़ के अऊ कोनों नई रिहिन, वोहा ऊहां ले भाग निकलिस।

कइसनो करके ओहा घर पहुंचिस। अरे या काये तारा ? का होगे। का घर मां कोनों नईये, केती चलदिन सब झिन ?

वे हा गौटियां तीर पहुंचिस। कका भइया कहां चल दिस ? ओहा बताइस तोर भइया कहां दूसर बिहाव कर लिस अऊ दूकान ला बैंच के नई जानन केती चल लिस। ओहा घर ला न ई बेचिस। ओहा कहाय के येहर दुलरवा के आय।

दुलरवा हक्का-बक्का हो गेय रिहिस। का लिला ये सनसार के, मोर भौजी मरिस त दूसर तियार, भइया ला घलोक का होगे। का भौजी हा सच काहय के ओमन का करहीं। मोर त सबे कुछु तेंह करबे। तेंहर सच काहस भौजी, इहां सबोच चीज हा फेर मिल जाथे, महूं ये दुनिया में नई रहना चाहंव।

वोहा भटकत नंदिया कोती भागीस। ओहा नंदिया मां जइसनेच गिरे बर करत रिहिस, ओलाअइसे लागिस के पानी मां भौजी के अवाज भरे हे, ओहा कांही काहत हे। दुलरवा तोर भइया हा त मोला भुलवारदिस, तहूं हा मोला भुला देना चाहत हस ? मोर नाव मेटागे दुलरवा... मोर नाव मेटागे।

दुलरवा ठो ठिकिस...। कौन भौजी... मेंहर तोर नाव ल नई मेटावन दंव। जतका खूंट ले मोरले बने सकही “भजी नाव ला अम्बर कर देहों।

दुलरवा हा लहुट आइस। ओहा घर के तारा ला टोर दिस अऊ घर मां रहे लागिस। दुलरवा हा मन मां भौजी के यादगारी मां कांही बनाय के परतिग्या करिस।फेर ओहा पढञे-लिखे त रिहिस नइए। ओहा बनिहार करईच ला बने समझिस, ओला दिन भर जऊन काम मिलय उही ला करय। अपन पेट काट के ओहा पैसा सकेलना सुरु करिस।

थोर-थोर मां तीन बच्छर बीत गे। मिहनत के मारे दुलरवा हा ये तीन बछर मां बने पैसा सकेल डारिस। ओहा मंदिर बनाय बर सुरु करिस। ओला अब अपन जियत रहे के भरोसा दिन-दिन कम होत दिखय। ओखर इच्छा रिहिस के मंदिर हा झट के पूरा हो जातिस। दुलरवा हा रात-दिन बनिहार मन मेंर बुता कराय लागिस।

दुलरवा हा आ गांव के मनखे मन बर अचंभा बने रिहिस हे। ओमन सबो झिन भौजी के मंदिर के बनावब मां मदत करत रिहिन।

दू महिना के अब्बड़ मिहनत करे के बाद ओखर मंदिर बन के तियार होइस। दुलरवा आज बड़ खुस रिहिस। ओहा सब गांव भर के मनखे मन ला नेवता दिस। सब्बो झिन आइन। सब्बो दुलरवा के खुसी मां संग दिन। कोनो मेर नाचा, कोनों मेंर गाना। आज गांव मं खुसीच-खुसीच दिखत रिहिस।

संझा कन कलस चढ़ाय के मुहुर्त रिहिस। दुलरवा ह सब झन ला ब लाइस। बेरा मां सब झिन आगे। ओतके बेर जोर से आंधी आय लागिस, मनखे मन एती ले ओती लुकाय लगिन।

कलस चढ़ाना जरूरी रिहिस, फेर अपन जीव ला कोन चोखिम मां डारय। दुलरवा ला फिकर होगे, का होही ? कलस ला दुलरवा अपनी पीठ मां बांध के डोरी के आसरा मां उप्पर चढ़े लागिस। मनखे मन दुलरवा ला अड़बड़ समझाइन फेर दुलरवा हा नई मानिस, ओहर तढ़तेच गईस। गांव वाला देखत रिहिन एक ठन हाड़ा के सांचा हर ऊपर कोती सरकत रिहिस। मनखे मन भगवान ला मनावत रिहिन के आंधी हा रुक जाय। फेर इहां त आज नर अऊ नरायन मां सरियत लगे रिहिस। दुलरवा उप्पर चढ़गे। ओहा कलसा ला मंदिर मां मढ़इस। मनखे मन जै जैकार करिन, दुलरवा मन मां फूलिस अतेक के नई समाइस। अरे... अरे... काहतेच दुलरवा हा भुंइया मं गिर परिस। आखिरी मां नरायने के जीत होगे। नर हा अपन मुंड़ ला गड़िया दिस।

जौन मेर थोकन बेर के पहिली खुसी मनावत रिहिन, उहें दुख के समुंदर लहराय लागिस। सब झिन कहे लागिन – भगवान बड़े निर्दयी हे। ओहा सब घर भर ला बाराबाट कर दिस।

मनखे मन दुलरवा के किरिया कमरम करिन। एती सोनकुंवर के दुनया उजर गेय रहिस। तभोले ओला आसरा रिहिस के दुलरवा जियत होही। फेर दुलरवा घलोक वो करम-छंड़हीन ला तरसत छोड़ के चल देय रिहिस।

एक दिन रमई कका ला घलोक भौजी के मंदिर के बिसेय मां सोर मिलिस, के दुलरवा ह जियत हे। ओहा मंदिर बनवावत हे। ओहा घर मां किहिस मेंहर काल दुलरवा के गांव जात हंव। दुलरवा उहें हे।

येला सोनकुंवर घलोक सुनिस। अब ओला बोध नइ रिहिस। ओहा रातो-रात अपन जोड़ी मेर भेंटे बर चल परिस।

बिहिनिया होत ओहा गांव पहुंच गे। दुलरवा के मौउत कइसे, काबर होइस, येला सब गांव के मनखे मन सोनकुंवर ला बताइन। सोनकुंवर हा बही मन असन मंदिर कोती दौड़िस। भौजी... भौजी... भौ...जी।

सोनकुंवर गिर परिस। ओखर नांक मां अड़बड़ जोर से परिस। ओखर जीयेच उड़ागे।

गोठ के बीते ले मनखे मन ला रोजेच दिया बरत दिखथे। मंदिर रोजेच सफ्फा रहिथे। ये तीन झन बुताय जीव फेर मिलके एके होगे हे। सच्चा पियार के तीन ठन मोती आज घलोक चमकत हवंय।

अऊ फेर...।

फेर का ? सब गोठ ला त मेंहर बता डारेंव।
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